रियर एक्सेल अधिकतर ट्रैक्टर में केवल पिछले पहिये को ही इंजन द्वारा विकसित शक्ति से चलाया जाता है, यह सशक्ति डिफरेंशियल द्वारा उन्हें समकोण पर प्राप्त होती है,वास्तव में पिछले एक्सेल का मुख्य भाग केसिंग होता है ,एक्सेल शाफ़्ट तो केवल डिफरेंशियल से मिली शक्ति को उनके किनारे पर फिर पहिये तक पहुंचने का कार्य करती है, जिनके द्वारा पहिये घूमकर चेचिस की रेड स्प्रिंग की सहायता से ड्राइव देते है।
प्रकार (TYPE OF rear axle)
रियर एक्सेल को दो भागो में बाटा जा सकता है.
डैड रियर एक्सेल (DED REAR AXLE)
इस प्रकार के एक्सेल को ईंजन को शक्ति द्वारा नहीं चलाया जाता है। इनका प्रयोग ट्रेलर में अथवा उन ट्रेक्टर में किया जाता है,जिनमे इंजन द्वारा केवल अगले पहिये को ही शक्ति दी जाती है।
लाइव रियर एक्सेल (LIVE REAR AXLE)
इस प्रकार के एक्सेलो को इंजन की शक्ति रियर बॉक्स व् डिफरेंशियल द्वारा देने की व्यवस्था की जाती है। सामान्य रुक से इसका प्रयोग सभी ट्रैक्टरों में किया जाता है। ये दो प्रकार के हो सकते है
फ्लेक्सिबल एक्सेल शाफ़्ट (FLECXBLE REAR AXLE) - इस प्रकार की व्यवस्था में इण्डिपेंडें सस्पेंशन का प्रयोग किया जाता है। एक्सेल शाफ्टों को यूनिवर्सल जॉइंट' द्वारा डिफरेंशियल से जोड़ा जाता है। डिफरेंशियल एक स्प्रिंग की सहायता से चेसिस के साथ जुड़ा रहता है।
रिजिड रियर एक्सेल(RIJIED REAR AXLE) - इसमें एक्सेल शाफ़्ट के अंदर वाले सिरे पर स्प्लाइन कटे होते है , इनकी सहायता से यह
डिफरेंशियल से जोड़े जाते है। इनके बाहर के सिरे पर पहिये फिट रहते है। इनके ऊपर एक्सेल केसिंग का भी प्रयोग किया जाता है।
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