Lubrication system used in engine (लुब्रिकेशन सिस्टम)

ऐसा पदार्थ जो दो धातुओं के चलने के बीच लगने बनने वाली रगड़ मतलब घर्षण को कम करें वह लुब्रिकेशन कहलाता है लुब्रिकेशन की एक पतली परत दोनों धातुओं के सतह के बीच लगाई जाती है जिससे यह दोनों धातु सीधे संपर्क में नहीं आ पाती है।

स्नेहक के प्रकार  
लुब्रिकेशन तीन प्रकार के होते हैं-
1.तरल liqwid
2.ठोस solid
3.अर्द्ध ठोस semi solid
1.तरल स्नेहक  - इनका आकार निश्चित होता है यह एक स्थान से दूसरेेेेेेे स्थान पर वह कर ले जा सकता है। इस गुण के कारण इसका अधिक प्रयोग किया जाता है
खनिज तेल
आगेनिक तेल 
सिंथेटिक तेल 
ब्लेंडेड तेल

2. ठोस स्नेहक - बहुत अधिक ताप पर तथा ताप पर ग्रीस  तथा तेल द्वारा स्नेहक सफल नहीं रह पाता ऐसे स्थानोंं पर ठोस स्नेहक उपयोग मिलाए जातेे हैं यह ठोस स्नेहक अधिक ताप पर स्नेहक करने में सफल रहते हैं।
3.अर्द्धठोस स्नेहक बहुत अधिक गाढ़ा तेल जो बहता नहींं है,
अर्द्ध ठोस स्नेहक कहलाता यह काफी ज्यादा प्रचलित है जैसे बेयरिंग, सॉफ़्ट में ग्रीस का प्रयोग किया जाता है।
लुब्रिकेशन के गुण (properties of lubrication)
श्यानता- किसीी भी तरल पदार्थ केे बहने  की दर को श्यानता कहते हैं, जो स्नेहक पतले होते हैंं उनकी श्यानता कम होती है, गाडे स्नेहक अधिक श्यानता  के होते के होते है।
तैलीय - किसी भी सतह को गिला तथा चिकना रखने के गुण को पहले कहते हैं
फायर पॉइंट - जिस तापक्रम पर कोई स्नेहल जलनेे लग वह उसका फायर प्वाइंट कहलाता है।


स्नेहक की विधिया  ( methods of leubrication)
1.अर्द्ध सम्प स्नेहक प्रणाली 
    स्प्लैश स्नेहक प्रणाली
    फोर्स फ़ीड प्रणाली 
    संयुक्त प्रणाली
2.पेट्रोयल या मिस्ट स्नेहक प्रणाली
3.ड्राई सम्प स्नेहक प्रणाली

स्प्लेश प्रणाली  -इस प्रणाली में स्नेहक के लिए तेल का छिड़काव का प्रयोग किया जाता है इंजन का तेल क्रैंक्षाफ्ट के नीचे लगे आयल सम्प चेंबर में भरा रहता है इनकी चलने पर क्रैंक्षाफ्ट के क्रैंकपिन (बिग एंड बेयरिंग) तथा वेट इस तेल में डूब कर चलते हैं, इनके चलने से जो तेल की छिटे उछलते हैं, उनके द्वारा इंजन के अंदर सभी भागों में स्नेहक हो जाता है।




फोर्स फीड प्रणली - इस प्रणाली में तेल उचित तेल मार्ग द्वारा प्रत्यक्ष रुप से इंजन की क्रैंक् शाफ़्ट, कनेक्टिंग राड, पिस्टन टाइमिंग गियर, केम सॉफ्ट में पहुंचाता है इस प्रणाली मेंं एक आयल पंप लगाया जाता है ,आयल पंप का काम ऑयल चेंबर में भरे आइल को प्रेशर के साथ आइल गैलरी में भेज कर पूरे सिस्टम को ऑयल से लुब्रिकेशन देना होता है।




स्नेहक प्रणाली के अवयव (components of a lubrication system)

ऑयल सम्प - इस ऑयल सम्प को इंजन केेे निचले भागों में म लगाया जाता हैै ऑयल सम्प के  अंदर ऑयल को भर दिया जाता है।



तेल पंप -  तेल पंप क्रैंक केस में तेल स्तर के नीचे लगाया जाता है यह चार प्रकार के होते हैं,हम आपको जो आज के उपयोग में लाये जाते है ,उन्ही के बारे मे बताएंगे.

1.वेन टाइप ऑयल पंप


 
2.प्लजर टाइप  ऑयल पंप 



3.गियर व्हील टाइप ऑयल पंप -ऑयल पंप का अधिक प्रयोग किया जाता है यह कैम् शाफ़्ट पर बनी स्पाइरल गियर द्वारा चलता है यह इस प्रकार फिट किया रहता है कि इसका लटकने वाला छल्ला हमेशा तेल में डूबा रहे इसमें 2 गियर होते हैं जिनके बीच की दूरी कम से कम रहती है ,1 गियर की सॉफ्ट पंप से बाहर निकलती रहती है तथा उसी शाफ्ट की सहायता से वह गियर केम शाफ़्ट स्पाइरल गियर घुमाता है जब कैम् शाफ़्ट घूमती है, तो पहले गियर द्वारा दूसरा संबंधित गेयर भी घूमता है, इसमें 2 पोर्ट बने होते हैं एक इनलेट पोर्ट दूसरा आउटलेट इंजन के चलने से जब गियर घूमता है,तो इनलेट पोर्ट द्वारा तेल कक्ष का तेल खींचकर पंप हाउसिंग में आ जाता है इन्ही गियर के द्वारा उस तेल पर दबाव पड़ता है हाउसिंग में आया वह तेल दवाब के साथ इंजन की मेन ऑयल गैलरी में आ जाता है ।मैन् ऑइल गैलरी का संबंध क्रैंक्षाफ्ट में छेद किए तेल मार्गो से रहता है इससे क्रैंक्षाफ्ट पर लगे मेन बियरिंग तथा बिग एंड बेयरिंग का स्नेहक होता है इसी प्रकार केम सॉफ़्ट, टाइमिंग गियर, गजन पिन, पिस्टन, सिलेंडर की दीवारों का स्नेहक करता है।



4. रोटर टाइप ऑयल पंप -यह भी गियर पंप के सामान्य कार्य करता है इसमें गियर की जगह दो रोटर का उपयोग किया जाता है पहला इनलेट रोटर व  दूसरा आउटलेट रोटर कहते हैं, इनलेट रोटर को आउटलेट रोटर के अंदर फिट किया जाता है जब इंजन घूमता है तो इसमें लगे रोटर भी घूमते हैं और ऑयल को प्रेशर के साथ आयल गैलर में भेजा जाता है।




आयल फ़िल्टर ऑयल को फिल्टर करता है जब आयल के भागो तक पहुंचता है तो पार्टस के टकराने के कारण उनके छोटे-छोटे महीन कण ऑयल सम में पहुंच जाते हैं जिसमें ऑयल को फिल्टर करने की आवश्यकता होती है इसलिए ऑयल फिल्टर को लगाते हैं आयल फ़िल्टर
तीन प्रकार के होते हैं
1.कार्टिज टाइप 
2. अपकेंद्री टाइप
3. अपकेंद्री टाइप

बेल्ट  बेल्ट ऑयल पंप से जुड़ी होती हैैैैैैैैैैै यह ऑयल पंप को चलाने का कार्य करती है  कहीं कही पर बेल्ट नहीं होती है वह उसमें ऑयल पंप गियर के द्वारा कैम्षाफ्ट से जुड़े होते हैं।
ऑयल प्रेशर रिलीफ वाल्व -इंजनों की तेल चाल पर ऑयल पंप की चाल भी बढ़ जाती है इसमें मेन ऑयल गैलरी में स्नेहक द्वारा तेल का दबाव काफी अधिक बढ़ जाता है ,इस प्रकार तेल इंजन के भागों में नही ठहर पाता है,इस दोष को दूर करने के लिए इसे लगाया जाता है इसे निश्चित दबाव पर खुलने के लिए एडजस्ट किया जा सकता है, जब इंजन तेज चलता है तो तेल का दबाव अधिक होकर इस प्रेशर रिलीफ वाल्व को खोल देते हैं।


फुहार छिद्र और गैलरी - इसमें ऑयल क्रैंक्षाफ्ट में से होकर कैम्षाफ्ट में जाता है कैम्षाफ्ट में जो होल होते हैं, इससे पिस्टन रिंग इनका स्नेहन होता है।
डिप स्टिक -यह निश्चित करने के लिए कि क्रैंक केस में पर्याप्त तेल है या नी। 
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Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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