General type axle , part of axle

  ट्रैक्टर के आधार इनकी विशिष्ट भूमिका के कारण कहा जाता है । एक्सेल वास्तव में एक घूमते पहिए या गियर हेतु एक केंद्रीय शाफ्ट होती है। यह अवयव एक वाहन से एंगेज या उसके साथ घूमता अथवा वाहन से जुड़ा संयोजित हो जा सकता है। पूर्व में बेयरिंग बुश माउंटिंग पॉइंट पर दिए जाते थे, जहां एक्सेल उसे सहारता था। बाद में बियरिंग एवं बुश पहिये  के केंद्रीय छिद्र में व्यवस्थित किए जाने लगे, ताकि पहिया एक्सेल से चारों ओर घूम सके । वास्तव में यह एक साफ्ट है, जो व्हील्स के साथ घूमती है।





फ्रंट एक्सेल (front axle)

चार पहिए वाली वाहनों या ट्रैक्टर के अगले पहिए को आवश्यकता पड़ने पर बिना स्लिप के मोड़ने के लिए तथा ट्रैक्टरों के नियंत्रित करने के लिए स्टीयरिंग का उपयोग किया जाता है। स्टीयरिंग के बहुत से भाग आगे के एक्सेल  से जोड़े जाते हैं। आगे के एक्सेल तथा स्टीयरिंग एक दूसरे से सीधे संबंध रखते हैं। इनका विस्तृत वर्णन निम्न प्रकार है।

कार्य (work of front axle)

1.अगले पहिए को इनके साथ जोड़ा जाता है ।

2. 4×4 वाले ड्राइव में पहिए में शक्ति इन्हीं एक्सेल के द्वारा दी जाती है।

 3.अगले एक्सेल के साथ लगे किंग पिन के कारण सरलता से मुड पाते हैं

 4.यह ट्रैक्टर के अगले भाग का भार भी वहन करते हैं

फ्रंट एक्सेल के भाग (parts of front axle)

फ्रंट एक्सल में उपरोक्त दो भागो के साथ निम्नलिखित भाग होते हैं 

1.एक्सेल बीम,

2.स्टेब एक्सेल,

3. एक्सेल बीम योक,

4. किंग पिन ,

5.गन मेटल बुश,

6. टेपर रोलर बेयरिंग एवं

7. थ्रस्ट वाशर या पैड।


एक्सेल दो प्रकार की होती हैं ( types of axle )

1.डेड़ फ्रंट एक्सेल dead front axle 

2. लाइव फ्रंट एक्सेल live front axle

 डेड फ्रेंड एक्सेल वाले ट्रैक्टरों में अगले पहिए को इंजन द्वारा विकसित सकती नहीं पहुंचाई जाती है जैसा कि पिछले पहिए के लिए व्यवस्थित की जाती है ।फ्रंट एक्सेल के साथ आगे पहिए के द्वारा ही ट्रैक्टर को रोकने में सहायता मिलती है । ये पहिये ट्रैक्टर का बोझ उठाने में सहायता करते हैं। ट्रैक्टर को स्टीयरिंग द्वारा अगले पहिए की सहायता से मोड़ा भी जाता है। फ्रंट एक्सेल वास्तव में दो भागों में बना होता है--- एक्सेल बीम तथा स्टब एक्सेल ट्रैक्टर का वास्तविक भार एक्सेल बीम पर ही रहता है। इस कारण एक्सेल बीम का पर्याप्त मजबूत होना आवश्यक होता है ।इसे अच्छे स्टील को फोर्ज करके बनाया जाता है। यह एक्सेल बीम 1st सेक्शन बीम के रूप में होती है ।इसी पर रोड स्प्रिंग के आधार के लिए स्थान बना होता है।

लाइव फ्रंट एक जिन ट्रैक्टर को अधिकतर कच्ची तथा ऊंची - नीची गद्देदार सड़कों पर चलना होता है अथवा जिनका उपयोग पहाड़ी आदि स्थानों में होता है, उसमें पिछले पहिए के सामान आगे को भी इंजन की विशेष शक्ति से ड्राइव दी जाती है। इसकी विशेषता यह है कि यदि पहले पहिए कच्ची या दलदल वाली जगह में फस जाए तो अगले पहिए द्वारा उन्हें उस स्थान से निकाला जाता सकता है। इसके अतिरिक्त चढ़ाई पर अगले पहिए को क्षति पहुंचाकर ट्रैक्टर की खिंचाई शक्ति बढ़ जाती है । इस प्रकार के फ्रंट एक्सेल में पिछले पहिए के सामान एक्सेल केसिंग में फिट किए जाते हैं। एक्सेल केसिंग में पिछले एक्सेल केसिंग की तरह बीच से शक्ति बांटने के लिए डिफरेंशियल का प्रयोग किया जाता है इस प्रकार के फ्रंट एक्सेल के लिए गियर बॉक्स के साथ एक विशेष प्रकार का गियर बॉक्स प्रयोग किया जाता है, जिसे ट्रांसफर केस कहते हैं।

Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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