1. हाइड्रोलिक पावर स्टीयरिंग
2. इलेक्ट्रिक पावर स्टीयरिंग
हाइड्रोलिक पावर स्टीयरिंग
ट्रैक्टर का अधिकांश भाग अगले पहिए पर पड़ता है इसलिए स्टीयरिंग व्हील घूमने में भर के अनुसार शक्ति लगानी पड़ती है छोटे अथवा साधारण ट्रैक्टरों को तो स्टेरिंग पर स्वयं की शक्ति लगाकर आसानी से मोड़ा जा सकता है परंतु अधिक भारी ट्रैक्टर में स्टेरिंग व्हील घुमाने में बहुत अधिक शक्ति लगानी पड़ती है इसलिए ऐसे भारी ट्रैक्टर में हवा की सहायता ली जाती थी, परंतु अब हाइड्रोलिक शक्ति की सहायता ली जाती है इसके द्वारा स्टीयरिंग व्हील को घुमाने अथवा ट्रैक्टर को मोड़ने में कम शक्ति लगानी पड़ती है इन्हें स्टेरिंग के अन्य भागों के अतिरिक्त आयल रिजर्वायर, हाइड्रोलिक पंप, पावर सिलेंडर तथा स्पूल वालों के साथ डिजाइन किया गया है
सिद्धांत- हाइड्रोलिक स्टीयरिंग प्रणाली पास्कल के सिद्धांत पर कार्य करती है इस सिद्धांत के अनुसार बंद बर्तन के अंदर अब सभी दिशाओं में समान रूप से संचारित होता है।
कार्य विधि -. हाइड्रोलिक आयल में रिजर्वयर में भरा रहता है जिसका संबंध हाइड्रोलिक पंप से रहता है इस पंप में दो पाइप तेल जाने व आने के लिए स्पूल वाल्व से जुड़े रहते हैं यह वाल्व की इस व्यवस्था का मुख्य अंग होता है , स्टेरिंग की विशेष प्रकार की बनी ड्रैग लिंक इस वाल्व् से जुड़ी रहती है स्पूल वाल्व से दो पाइप तेल जाने व आने के लिए पावर सिलेंडर से जोड़े जाते हैं ,जब स्टीयरिंग व्हील घुमाया जाता है तो सेक्टर शाफ्ट द्वारा ड्रैग लिंक स्पूल वाल्व अपना प्रभाव डाल कर नान रिटर्न वाल्व को खोलती है जिससे पंप द्वारा आया हाइड्रोलिक दवाब स्टीयरिंग आर्म को प्रभावित करके स्टेरिंग द्वारा पहिये को मोड़ता है जब दूसरी दिशा में स्टीयरिंग घुमाया जाता है तो स्पूल वाल्व का दूसरा नाम रिटर्न वाल्व खुलता है तथा हाइड्रोलिक दबाव पावर सिलेंडर की सहायता से स्टीयरिंग आरंभ को दूसरी दिशा में घूमता है जब किसी कारण हाइड्रोलिक व्यवस्था खराब हो जाए तो इसे साधारण स्टीयरिंग की तरह भी प्रयोग किया जाता है इसका मुख्य लाभ यह है कि इसमें शक्ति कम लगानी पड़ती है तथा मुड़ने की क्रिया शीघ्र हो जाती है हाइड्रोलिक स्टेरिंग प्रणाली के मुख्य भाग निम्न है
पंप - यह एक स्टेरिंग पंप होता है जिसका उपयोग हाइड्रोलिक प्रवाह के उत्पादन में किया जाता है तथा इसको इंजन के नजदीक स्थित किया जाता है पंप में जला से और कंट्रोल बाल भी पंप के सम्मिलित होते हैं बंपर रोलर और बेन प्रकार का हो सकता है दोनों में से किसी एक चुना जा सकता है।
वाल्व - तरल प्रभाव के दाब के नियंत्रण के लिए वाल्व का प्रयोग किया जाता है वह वाल्व जो त्रल प्रभाव को नियंत्रित करती है कंट्रोल वाल्व कहलाती है ,तथा वह वाल्व जो दिशा को नियंत्रित करती है रिलीफ वाल्व कहलाती है।
स्टीयरिंग गियर अनुपात -स्टीयरिंग व्हील के चक्कर की संख्या तथा स्टीयरिंग गियर बॉक्स आफ के चक्रों की संख्या के अनुपात को स्टीयरिंग गियर अनुपात कहते हैं, क्योंकि स्टीयरिंग बॉक्स बहुत कम घूमती है अतः स्टीयरिंग व्हील जितने डिग्री घूमता है और उससे बॉक्स कितने डिग्री घुमाती हैं, उन दोनों के अनुपात अनुपात को स्टीयरिंग गियर अनुपात कहते हैं हल्के ट्रैक्टरों में यह अनुपात कम भारी ट्रैक्टरों मेंं अधिक होती हैै।
स्टीयरिंग प्ले एडजेस्टमेंट - ट्रैक्टर स्टीयरिंग का सेक्टर परयः बुश व अरिंग में घूमता है तथा वर्म के नीचे वॉल अथवा टेपर रोलर बियरिंग का प्रयोग किया जाता है ट्रैक्टर के नीचे ऊंची भूमि कुछ के लगने के साथ चलने से स्टीयरिंग में प्ले आ जाती है, इससे स्टेरिंग ठीक प्रकार कार्य नहीं करता है तथा शक्ति भी अधिक लगानी पड़ती है।
