Gearbox types in hindi

गियर बॉक्स के प्रकार व कार्यप्रणाली

गियर बॉक्स में गियर के अलग-अलग जोड़ों को मिलाने के आधार पर उन्हें चार प्रकार में बांटा गया है--

1. स्लाइडिंग मेश गियरबॉक्स - इस प्रकााार की गेर बॉक्स मैं मेन शाफ्ट केेेेेेेेेेेेेेे गैरों को किसका कर ले शाफ्ट पर बने उसके जोड़े के साथ मिलाया जाता है , इसलिए इस गैर बॉक्स को स्लाइडिंग मेश गियरबॉक्स कहते हैं। इसके निम्न भाग होते हैं-
प्राइमरी शाफ्ट या ड्राइव शाफ्ट ,प्राइमरी शाफ्ट बेयरिंग ,मेन शाफ्ट या ड्राइविंग शाफ्ट ,मेन ऑफ वेयरिंग ,ले- शाफ्ट या काउंटर्न शाफ्ट, ले शाफ्ट बेयरिंग सेट ,रिवर्स शाफ़्ट या रिवर्स आइडलर शाफ्ट, गियर बॉक्स हाउसिंग, गियर चेंज लीवर ,टॉप कवर, गियर सिलेक्टर शाफ्ट, गियर सलेक्टर फ़ार्क।


कार्यप्रणाली - इस तरह अवस्था में ट्रैक्टर को गतिशील करनेेे के लिए सर्वप्रथम गियर डालने की आवश्यकताा पड़ती है अब चलती हुई डिसएंगेज ट्रैक्टर को इंंजन की उसी चाल पर तेज शीला चलानेेे के लिए गियर बदलनेे की आवश्यकता पड़ती है जब ट्रैक्टर को गतिशील कियाा जाता है ,तो  प्रयः पहलेेे गियर को डाला जाता ट्रैक्टर के गतिशील होने के कारण दूसरे तीसरे व चौथे गियर को यथास्थिति डाला जाता है।

पहला गियर- पहले गियर को डालने के लिए ले शाफ्ट की सबसे छोटे गियर से मेंंन्शाफ्ट के सबसे बड़े गियर के गियर लीवर सिलेक्टर शाफ्ट फ़ार्क की सहायता से खिसका कर मिलाया जाता है पहले गियर में शक्ति सबसे अधिक प्राप्त होती है परंतु चाल सबसे कम होती है क्योंकि ले शाफ्ट का सबसे छोटा गियर 
मेंन शाफ़्ट के सबसे बड़े गियर को चलाता है।



दूसरा गियर -यह गियर वाहन की गति सी अवस्था में डाला जाता है इस गियर में ले शाफ्ट के बीच गियर  से मेन् सॉफ्ट का बड़े से छोटा गियर खिसका कर मिलाया जाता है ,इस गियर में पहले गियर की अपेक्षा शक्ति तो कम ही प्राप्त होती है परंतु वाहन की चाल कुछ बढ़ जाती है।



तीसरा गियर -इस गियर में ले- शाफ्ट के सबसे बड़े गियर से मेन शाफ्ट के सबसे छोटे गियर को खिसका  कर मिलाया जाता है इस गियर में शक्ति तो  और भी कम होती है परंतु इंजन पर लोड पड़ता है तथा पहले की अपेक्षा इंजन चाल बढ़ जाती है।



चौथा या टॉप गियर- ट्रैक्टर की अधिकतम इसी गियर में प्राप्त की जा सकती है क्योंकि वाहन इससे पूर्व ही सब अवरोधों ( भार तथा चढ़ाई) को पार करके अपनी सामान्य चाल पर चलाने लगता है, इस गैर को डालने के लिए मेन शाफ़्ट का संबंध बिना किसी गियर के माध्यम से सीधे ही प्राइमरी शाफ्ट से कर दिया जाता है।

न्यूट्रल गियर - इंजन की चाल चलती दिशा में यदि ट्रैक्टर खड़ा करना है तो गियर बॉक्स को न्यूट्रल करना होता है ,यदि टॉप गियर की अवस्था में मेन शाफ़्ट का संबंद्ध  प्राइमरी शाफ्ट से हटा दिया जाय, तो गियर बॉक्स न्यूट्रल हो जाता है अर्थात इंजन की शक्ति ले- शाफ़्ट तक ही सीमित रहती है।
रिवर्स गियर - ट्रैक्टर को आवश्यकता पड़ने पर पीछे की ओर भी चलना पड़ता है इसके लिए रिवर्स गियर डाला जाता है इस गियर में लगभग पहले गैर की बनावट शक्ति तथा चाल प्राप्त होती है इस गियर को डालने के लिए मेन शाफ़्ट के सबसे बड़े गियर को 
खिसका कर रिवर्स शाफ्ट के गियर  से मिला दिया जाता है। रिवर्स शाफ्ट का आइडलर गियर शाफ्ट के छोटे गैर से मिला रहता है तथा उससे विपरीत दिशा में घूमता रहता है।


2.कैंर्टेन्ट मैश गियर बॉक्स- बिना आवाज के सरलता पूर्वक गियर बदलने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है, यह भी स्लाइडिंग मेश गियरबॉक्स का ही सुधार रूप है इसमें सभी उसी प्रकार लगभग सभी भाग होते है।केवल स्लाइडिंग कॉलर नए भाग होते हैं, परंतु इसमें मेन शाफ़्ट पर जो गियर चढ़ रहे हैं ,वे मेन शाफ़्ट के खाचो में शब्दों के खांचे में फिट ना होकर मेन शॉप पर बनी समतल जगह पर से किए जाते है, जिससे कि यह शासकों कमाए बिना भी सरलता से हो सके, यह सभी गियर  शाफ्ट पर बने अपने जो के गियर से हमेशा मिले रहते हैं।

3 सिंक्रोमेश गियरबॉक्स - किसी भी ट्रांसमिशन प्रणाली में बिना आवाज सरलता से दो अलग-अलग चाल पर चलते हुए गियरों को मिलाने के लिए यह आवश्यक है, कि उन दोनों गियरों की चाल पूर्ण लगभग एक जैसी की जाये, जिस प्रकार चलते ट्रैक्टर में चढ़ते समय अपनी चाल लगभग ट्रैक्टर के सामान करनी होती है यह गियर बॉक्स स्लाइडिंग मेश गियरबॉक्सस तथा कॉनसेन्ट मैश गियर बॉक्स का मिला जुला रूप होता हैं। इसके में भाग होते हैं-
1.सिंक्रोनाइजिंग रिंग 
2.सिंक्रोनाइजिंग क्लच हब 
3.सिंक्रोनाइजिंग क्लच स्लीव
4.सिंक्रोनाइजिंग क्लच स्प्रिंग


4.प्लेनेटरी या एपीसाइक्लिक गियर बॉक्सइस गियर बॉक्स के अंदर गियरों को शिफ्ट नही करना पड़ता,जिससे गियर में कोई गिरावट नहीं आती ,जिसके कारण गियर बॉक्स में आवाज भी नहीं होती, ऐसी गियर बॉक्स का निर्माण अभी हमारे देश में नहीं हुआ है अब अगर सन गियर को घुमाया तो  इंटरनल गियर भी उसके साथ घूमेगा और प्लेनेट पिनियन खड़े होंगे। जब ब्रेक बेंड द्वारा इंटरनल गियर को बाहर पकड़ ले और संन् गियर के घूमने से प्लेनेट गियर सन गियर  के ऊपर और प्लेनेट गियर के अंदर लगे होने के कारण घूमना शुरू हो जाएगा। यह प्लेनेट गियर कैरियर प्लेट द्वारा आपस में मिले होते हैं, इसलिए कैरियर प्लेट घूमेगी और अगर कैरियर प्लेट के साथ एक साथ लगा दे तो वह शाफ्ट  भी घूमेगी। इस प्रकार एक गियर अनुसार मिलेगी, अगर दूसरी स्थिति में प्लेनेट कैरियर को पकड़ लेते हैं तो प्लेनेट गियर आइडलर गियर का काम करेगा और इंटरनल गियर घूमना शुरू कर देगा ।इंटरनल गियर के बैक में स्लाइज बनी होती है जिनसे पावर शॉप में जाएगी प्लेनेटरी प्रकार के गियर दो प्रकार के होते हैं-

1.साधारण प्लेनेटरी टाइप गियर बॉक्स
2.  युग्म प्लेनेटरी टाइप गियर बॉक्स

















Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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