differential
इंजन की विकसित शक्ति रियर बॉक्स से प्रोपेलर शाफ्ट तथा टेल पिनियन तक एक लाइन में जाती है, जबकि रियर एक्सेल शाफ़्ट इसके समकोण पर लगे होते हैं ,जिनसे पिछले पहिया चलाए जाते हैं, इसलिए कोई ऐसा प्रबंध करना आवश्यक होता है कि इस एक सीध में आई शक्ति 90 डिग्री पर बाटकर दोनों हाफ रियर एक्सेल शाफ्ट के माध्यम से पहियो को प्राप्त हो सके। इसके लिए भी डिफरेंशियल का प्रयोग करना आवश्यक होता है। प्रोपेलर शाफ्ट तक आई शक्ति टेल पिनियन के द्वारा क्रॉउन व्हील को मिलती है। यही इस साल का कोण परिवर्तन होता है। इसके अतिरिक्त ट्रैक्टर को ऊंची - नीची सताए पर भी चलना होता है, उस समय ऊंचाई पर चढ़कर निकलने वाले पिछले पहिए को अथवा नीचे गड्ढे में से गुजरने वाले पिछले पहिए को समतल भूमि पर चलाने वाले पहिए की अपेक्षा अधिक चलना पड़ता है।
इस प्रकार जब ट्रैक्टर मुड़ता है तो अंदर वाले पहिए को कम दूरी चलनी पड़ती है तथा भार वाले पहिए को अधिक दूरी चलनी पड़ती है दोनों समय में पिछले पहिए की चाल में अंतर पढ़ने में कोई कठिनाई ना हो इसके लिए भी डिफरेंशियल का प्रयोग किया जाता है । यदि ऊंची नीची सतह पर चलने के लिए यह प्रबंध ना हो तो एक पहिया घिसटकर कर चलेगा ,जिससे एक्सेल शाफ्ट टूटने का भय रहेगा। इसी प्रकार मुड़ते समय ट्रैक्टर के पिछले पहिए की चाल में अंतर नहीं हो सकेगा। तो ट्रैक्टर मुड़ने के लिए बहुत अधिक स्थान की आवश्यकता होगी तथा अंदर वाला पहिया घिसटकर चलेगा। इससे टायर शीघ्र घिसेंगे और एक्सेल के भी टूटने का भय रहेगा ।
इसलिए कहा जाता है कि ''डिफरेंशियल एक ऐसी इकाई है जो इंजन से आई शक्ति को एक समान 90 डिग्री पर दोनों हाफ़ एक्सेल शाफ्टों की सहायता से पहियों तक पहुंचाने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर उनकी चाल में अंतर डालने का कार्य करता है।'' (Differential is a unit that works by conveying the power from the engine to the wheels at the same 90 degrees with the help of both the half axle shafts, as well as to differentiate their speed when required.)
बनावट व कार्यप्रणाली( how to make differential )
1. क्रॉउन व्हील 2.टेल पिनियन 3.सन पिनियन 4.स्टार पिनियन
5.केज 6.डिफरेंशियल बियरिंग 7.स्पाइडर तथा 8.टेल पिनियन बेयरिंग।
क्रॉउन व्हील डिफरेंशियल केज के साथ एक हाउसिंग में बंद रहता है तथा प्रोपेलर शाफ्ट से जुड़ी टेल पिनियन का पिनियन वाला भाग बेयरिंग की सहायता से क्रॉउन व्हील के साथ हाउसिंग में उससे मिला रहता है ।इसे प्राय: चक नट द्वारा टाइट किया जाता है तथा इसी के साथ एक फ्लैट फिट रहता है ,जिसके साथ यूनिवर्सल ज्वाइंट की सहायता से प्रोपेलर शाफ्ट जुड़ी रहती होती है। टेल पिनियन फिट करने के लिए अधिकतर दो बेयरिंग का प्रयोग किया जाता है। इनको टाइट या ढीला करके बैकलेस एडजस्ट करने में सहायता ली जाती है। क्रॉउन व्हील के साथ केज के अंदर सन पिनियन तथा स्टार पिनियन वोल्ट द्वारा जुड़ी रहती है। केज के अंदर दोनों सन पिनियन एक्सेल शाफ्ट को अपने में फंसा लेती है।दोनों सन पिनियन संबंध स्टार पिनियन तथा स्पाइडर द्वारा आपस में बना रहता है। इस प्रकार जब ट्रैक्टर को चलाया जाता है ,तो रियर बॉक्स द्वारा प्रोपेलर शाफ़्ट, टेल पिनियन को घुमाती है। टेल पिनियन द्वारा क्रॉउन व्हील घूमता है ।इसे इस पर लगी संपूर्ण केज़ एक हवाई बनकर घूमती है तथा संन पिनियन में फंसे एक्सल सॉफ्ट घूमकर पहियो को घुमाते हैं। इस समय डिफरेंशियल द्वारा दोनों पहियो को एक समान शक्ति तथा चाल मिलती है, क्योंकि दोनों सन पिनियन समान संपूर्ण केज़ के अनुसार घूम रहे होते हैं, परंतु जब ट्रैक्टर ऊंची नीची सतह पर चलता है अथवा मोड़ रहा होता है, तो उस समय उसके पिछले पहियों की चाल में अंतर आ जाता है ।मुड़ते समय अंदर वाले पहिए की चाल जब लोड पड़ने पर कम हो जाती है ,तो उसका प्रभाव उससे जुड़े सन पिनियन पर भी पड़ता है। इससे वह सन पिनियन भी अपनी चाल को कम कर देती है। उस समय उससे लगी स्टार पिनियन, जो अब तक एक इकाई के रूप में ही घूम रही थी, वह स्वतंत्र रूप से अपनी जगह पर स्पाइडर में ही फ्री घूमने लगती है। इस प्रकार इस पर यह तथा संन पिनियन का संबंध दूसरे सन पिनियन से नहीं रह जाता है तथा दोनों पहिए स्वतंत्र रूप से आवश्यक चाल पर घूमते हैं। इस समय कम चलने वाले पहिए को प्राप्त होने वाली अतिरिक्त शक्ति भी अधिक चलने वाले पहिए को प्राप्त होने लगती है, जिससे थोड़े से स्थान में शीघ्र मुड़ने की क्रिया हो जाती है।
