संपीड़न इग्निशन C.I
1.सक्शन के समय केवल शुद्ध हवा सिलेंडर में आती है ।
2.इस कंप्रेशन अनुपात 1:12 से 1:22 तक होता है।
3. इग्निशन केवल हवा के संपीडन के द्वारा बड़े हुए तापमान के द्वारा होता है ।
4.डीजल ऑयल सस्ता होता है तथा 1hp के लिए पेट्रोल की अपेक्षा कम खर्च होता है।
5. इसमें फ्यूल इग्निशन पंप द्वारा फ्यूल सिलेंडर में भेजते हैं यह डीजल चक्र के सिद्धांत पर काम करता है ।
6. इसमें हीट का एडिशन स्थिर दाब पर करते हैं।
7.डीजल इंजन ठंडा होने पर बहुत देर में स्टार्ट होता है।
1.सक्शन के समय वायु + पेट्रोल सिलेंडर में आती है ,कार्बोरेटर के द्वारा हवा में पेट्रोल का मिश्रण एक निश्चित अनुपात में आता है।
स्पार्क इंजन S.I
2.इस कंप्रेशन अनुपात 1:6 से 1:10 तक होता है।
3. इसमें ईंधन को जलाने के लिए स्पार्क प्लग की सहायता ली जाती है।
4. पेट्रोल की कीमत अधिक महंगा होता है यह 1 hp के डीजल अपेक्षा ज्यादा खर्चा लेता है ।
5.कार्बोरेटर के द्वारा फ्यूल भेजते हैं वायु + पैट्रोल ऑटो चक्र का काम करता है ।
6.पेट्रोल इंजन जल्दी स्टार्ट हो जाता है।
कार्य विधि के आधार पर दोनों में अंतर
संपीडन इंजन
1.एक स्ट्रोक में दो क्रियाएं होती हैं ।
2.इसमें एक वर्किंग साइकिल कंप्लीट करने में क्रैंक्षाफ्ट को दो चक्कर पूरा करना पड़ता है।
3. इसमें ईंधन जलने में समय कम होता है।
4. एक वर्किंग साइकिल पूरा करने में पिस्टन दो स्टोक पूरा करता है।
स्पार्क इंजन
1.एक स्ट्रोक में एक क्रिया होती है।
2. एक वर्किंग साइकिल को दो चक्कर पूरा करना पड़ता है ।
3.इसमें ईंधन जलने का समय पर्याप्त होता है।
4. इसमें चार स्टोक पूरा करता है।
बनावट के आधार पर दोनों में अंतर
संपीड़न इंजन
1.इसमें पोर्ट होता है।
2. क्रेक केस शील्ड होती है।
3.पिस्टन डोम हेड का होता है
4.यह एयर कूल्ड इंजन होता है।
5. 2 स्ट्रोक इंजन कम स्थान गिरता है।
स्पार्क इंजन
1.इसमें वाल्व होता है।
2. क्रेक चेंबर में नीचे ऑयल सम लगा होता है।
3. प्रायः पिस्टल समतल होता है।
4. वाटर कूल्ड इंजन का प्रयोग किया जाता है।
5. यह ज्यादा स्थान गिरता है।
अन्य अंतर
संपीड़न इंजन
1.2 स्ट्रोक इंजन की आवाज अधिक होती है।
2.पोर्ट होने के कारण इंजन हल्का होता है।
3.एक सिलेंडर एक चक्कर पावर मिलने के कारण इससे इंजन संतुलित होता है।
4. यांत्रिक दक्षता अधिक होती है।
स्पार्क इंजन
1.इसमें आवाज कम होती है।
2. यह वाल्व के कारण भारी होता है ।
3. 2 चक्र में एक बार पावर मिलती है इससे इंजन संतुलित नहीं होते हैं।
4. इसमें दक्षता ज्यादा होती है
