How to oxy acetylene welding

इसके द्वारा वेल्डिंग करने से एक विशेष फ्लक्स का प्रयोग करना चाहिए इस फ्लेक्स में ऑक्साइड को अपने अंदर खलने की शक्ति होनी चाहिए और आगे भी ऑक्साइड बनने से रोक सकने की भी शक्ति होनी चाहिए, मोटे भाग बेल्ट करने के लिए फिलर रॉड भी बेस हाथों के कंपोजीशन की होनी चाहिए साधारण 5℅ सिलिकॉन युक्त पिलर रॉड प्रयोग की जाती है, अच्छा फ्यूजन और गहराई तक वेल्डिंग करने के लिए जॉब को पृ- हिट करना आवश्यक है पूर्व तापन से क्रेक होने की संभावना भी कम हो जाती है पूर्व तापन 250 डिग्री सेल्सियस से 400 डिग्री सेल्सियस तक करना चाहिए, पिघली अवस्था में एलमुनियम, फ्लेम की बाहरी छोर में उपस्थित नमी से क्रिया करके हाइड्रोजन बनाती है ,और उनको अपने अंदर सोख लेता है यह हाइड्रोजन बेल्ट धातु के ठंडा होने पर निकलती है या अंदर ही रह जाता है इससे पोरोसिटी आ जाती है यह सबसे सस्ती विधि है इसमें 0.8mm से 25 mm मीटर मोटी चादर वेल्ड की जा सकती है। ऐसी क्लीन गैस ऑक्सीजन के साथ निम्न प्रकार क्रिया कर उसमें प्रदान करती है
C2H2+O2=2CO+H2+107500 कैलोरी
प्रकार
गैस वेल्डिंग मे एसिटिलीन गैस तथा ऑक्सीजन ही अधिकतम प्रयोग की जाती है ए सिटिलीन के दाब के आधार पर गैस वेल्डिंग दो प्रकार की होती है 
उच्च दाब वेल्डिंग एसिटिलीन गैस को बड़े कारखानों में तैयार करके 15 किलोग्राम वर्ग सेंटीमीटर दाब पर सिलेंडर में भरकर प्रयोग किया जाता है तो इस वेल्डिंग को उच्च दाब बिल्डिंग कहा जाता है । 
 निम्न दाब वेल्डिंग जब एसिटिलीन गैस का उत्पादन छोटे से गैस जनित्र में कार्यस्थल पर 1.00 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर दाव पर या इससे भी कम दाब पर करके वेल्डिंग की जाती है तो इसे निम्न दाब वेल्डिंग कहते हैं।
लाभ

* इस वेल्डिंग से संबंधित उपकरण मितव्ययी वह हल्के तथा उपयोग में आसान होते हैं
* इस विधि में विविध प्रकार की धातुओं को जोड़ा जा सकता है। 
* यह जोर लगाने की मितव्ययी विधि है। 
* इससे निर्मित जोड़ मजबूत तथा टिकाऊ होते हैं।
* आर्क वेल्डिंग के तुल्य इससे निर्मित जोड़ ज्यादा लचीले होते हैं

Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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