धातु चादर शाला में विभिन्न प्रक्रमों को संपन्न करने के लिए विविध किस्म की चादरों का उपयोग किया जाता है और चादरों की मोटाई को मानक वायर गेज के नंबर द्वारा प्रदर्शित किया जाता है यह नंबर जितना कम होगा चादर उतनी ही मोटी होगी तथा नंबर जितना अधिक होगा चादर उतनी ही पतली होगी।
लोहे की चादरे
लोहे की चादर ही धातु चादर शाला में सबसे अधिक प्रयोग होती है यह कई प्रकार की होती हैं--
काली लोहे की चादर -- रॉट आयरन की बनी कोरी (अलेपित) चादरे लोहे की काली चादर के नाम से जानी व पहचानी जाती है
सक्षारण अवरोधी न होने के कारण वायुमंडल प्रभाव में इन पर मोर्चा लग जाता है इस कारण इनका रंग पूरा काला हो जाता है यह चादरे मुलायम डाक्टइल तथा आघातवर्धय होती है।
गेलवेनाइज़्ड लोहे की चादर - काली लोहे की चादर को जंगरोधी बनाने के लिए उसको पिघले हुए जस्ते में डूबा कर उस पर जिंक की एक पतली परत चढ़ा दी जाती है इस जिंक की परत चढ़ी हुई सीट को गेलवेनाइज़्ड लोहे चादर कहते हैं इसका उपयोग पानी की टंकी अनाज रखने की टंकी बक्से बसों की बॉडी आदि बनाने के लिए किया जाता है।
टिन लेपित चादरे - जििंक के समान लोहे की चादरों पर टिन धातु का लेप भी किया जाता है ,टिन लेपित लोहे की चादरे अधिक खूबसूरत तथा प्लेन होती है इनको खाघ वस्तुओं रखने के डिब्बे बनाने में प्रयोग किया जाता है।
तांबे की चादरे - लोहे की चादरों की तुलना में ये मुलायम तथा आघातवधर्य होती है इसमें लचक होती है इसे आसानी से किसी भी आकार मोड़ जा सकता है उसमें तथा विद्युत का सुचालक होने के कारण आजकल इसका उपयोग बिजली के सामान ,गीज़र पाइप, रेडिएटर आदि बनाने में किया जाता है।
पीतल की चादरे -यह तांबे तथा जल का अलाय होता है पीतल की चादरे की तुलना में अधिक कठोर तथा सस्ती भी होती हैं पीतल पर भी वायुमंडल का प्रभाव नहीं पड़ता इसका उपयोग बर्तन बनाने वाल्व की कैप बनाने, हाइड्रोलिक वाल्व बनाने तथा आर्ट- वेयर बनाने में भी किया जाता है।
एलमुनियम चादरे -एलमुनियम की चादरे हल्की मुलायम, मजबूत सरक्षण अवरोधी सस्ती घरेलू बर्तन एलमुनियम की चादरे के बनाए जाते है।
स्टेन लैस स्टील की चादरे- क्रोमियम मिली हुई इस्पात की चादर बहुत अधिक समर्थवान एवं आघातवर्ध्य तथा बहुत अधिक सक्षारण अवरोधी होती है इन पर वातावरण तथा हल्की तेजाब और क्षारो का प्रभाव नहीं पड़ता।
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