Steeiring system components

 स्टीयरिंग शब्द अंग्रेजी शब्द  के स्टीयर से लिया गया है जिसका अर्थ मुड़ना /घुमाना या मार्गदर्शन करना स्टेरिंग प्रणाली का संबंध ट्रैक्टर के आगे पहिए के साथ होता है स्टियरिंग के कुछ भाग फ्रंट एक्सल के साथ संबंध रहते हैं अर्थात फ्रंट एक्सल की सहायता से ही स्टीयरिंग प्रणाली कार्य करती है।

स्टीयरिंग व्हील - स्टीयरिंग व्हील आकार में गोल व हार्ड रबड़ प्लास्टिक का बना होता है स्टीयरिंग व्हील को साँचे में  ढालते समय इसके अंदर स्टील तार डाल दी जाती है ताकि इसके अंदर मजबूती बनी रहे।

बाहरी ट्यूब - यह एक हुगली ट्यूब होती है जिसका एक भारत स्टीयरिंग व्हील के साथ जाकर समाप्त होता है इसी बात में एक बोस लगा होता है जिसके अंदर स्टीयरिंग शाफ्ट आसानी से घूमती है।

स्टीयरिंग शाफ़्ट - स्टीयरिंग शाफ्ट का एक भाग स्टीयरिंग व्हील तथा दूसरा भाग स्टीयरिंग बॉक्स के अंदर वर्ग के साथ फिट होता है इस शाफ़्ट के दोनों सिरों पर एक-एक बियरिंग दिया जाता है ताकि स्टीयरिंग शाफ्ट आसानी से घूम सके।

स्टीय रिंग गियर -बॉक्स हाउसिंग के अंदर स्टीयरिंग गियर को वर्म के साथ फिट किया जाता है।

 क्रॉस शाफ्ट - इसका दूसरा नाम राकर शाफ़्ट है इसका एक सिर चलित गियर के साथ समकोण पर फिट होता है तथा दूसरे सिरे पर लंबी झिर्रिया कटी होती है जिस पर ड्रॉप आर्म को काटर सहित फिट किया जाता है यह हार्ड स्टील की बनी रहती है ।

ड्रॉप आर्म- इसको स्टीयरिंग आर्म या पिटमैन आर्म भी कहते हैं इसका एक सिरा क्रास शाफ़्ट से जुड़ा रहता है तथा दूसरे सिरे पर ड्रैग लिंक बधा रहता है यह क्रॉस सॉफ्ट के घूमने से लिंक को आगे पीछे ले जाता है जिससे ट्रैक्टर घूमने पर दाएं या बाएं मुड़ जाता है।

टाई राड़ - यह ड्रैग लिंक मोटे इस्पात ( स्टील) के पाइप की बनाई जाती है इसके दोनों सिरों पर चूड़ियां कटी होती है और एक सीधी तथा दूसरी ओर उल्टी चूड़ी होती है ड्रैग लिंक का कार्य स्टीयरिंग की गति को स्टब एक्सल पर लगे ऑर्म पर पहुंचाने के लिए होता है।

बॉल जॉइंट - ड्रैग लिंक औऱ टाई रॉड के दोनों सिरों पर बाल जॉइंट के द्वारा जोड़ा जाता है यह परिवर्तन बॉल जॉइंट चारों और प्रत्येक कोण पर घूमता है, स्टीयरिंग के संयोजन फ्रेम के ऊपर और स्टाब एक्सेल बीम के सिरों पर फिट किया जाता है फ्रंट एक्सल  की सहायता से चेचिस के साथ लगा होता है इस प्रकार 3 भाग के लाइन में न होने के कारण आपस में जो कोण बनता है उसमें अंतर आ जाता है।

स्टीयरिंग गियर बॉक्स -स्टीयरिंग गियर बॉक्स का कार्य व्हील की घूर्णन गति को ड्रॉप ऑर्म के इधर उधर की गति में रूपांतरित करना है जिसके फलस्वरूप ड्रैग लिंक का गठबंधन ड्राप ऑर्म के साथ किया जाता है,पुश या पुल के परिणामस्वरुप चलाएंमान स्टब एक्सेल दाएं और बाएं अथवा चालक की इच्छा अनुसार मुड़ने में सक्षम होता है।





स्टीयरिंग का कार्य प्रणाली 

स्टीयरिंग व्हील को इछित दिशा में घुमाया जाता है इसके घूमने से स्टीयरिंग कॉलम घूमकर वर्म को कम घुमाती है वर्म के घूमने से उससे लगा सेक्टर चूड़ियों के कारण घूमने  लगता है सेक्टर की यह चाल ड्रॉप आर्म को स्टेयरिंग घुमाने की दिशा के अनुसार आगे या पीछे करती है, इसे पुल एंड पुश रॉड तथा ड्रैग लिंक भी कहा जाता है स्टीयरिंग के द्वारा स्टब एक्सेल को दाएं या बाएं घूम घुमाती है जिस पर पहिया लगा होता है स्टब एक्सेल की  यह चाल कलेक्टिंग ऑर्म के द्वारा रॉड की सहायता से दूसरे पहिए के स्तब एक्सेल तथा पहिये को घुमाती  है, इस प्रकार दोनों को एकसामान दिशा में घूमते हैं स्टीयरिंग व्हील को एक सीमा तक घुमाया जा सकता है यह सीमा वर्मा तथा सैक्टर पर निर्भर करती है स्टेरिंग व्हील को  छोटे चक्कर तक घूमने की व्यवस्था रहती है इससे स्टीयरिंग के प्रयोग में कम शक्ति लगानी पड़ती है वैसे स्टीयरिंग पर लगाई गई शक्ति उस में प्रयोग किए गए गियर अनुपात पर निर्भर करती है गियर अनुपात से तात्पर्य स्टीयरिंग व्हील तथा सेक्टर शाफ़्ट के घूमने के अनुपात से है कि कितने चक्कर स्टीयरिंग व्हील को घुमाया जाए तब सेक्टर शाफ़्ट 1 चक्कर घूमेगी, प्रयः छोटे ट्रैक्टरों के लिए यह अनुपात 8:1 से 20:1 तक तथा भारी ट्रैक्टरों में यह अनुपात 20:1 से 30:1 एक तक भी रहता है इसे स्टीयरिंग हल्का घूमता है तब तक चलने वाले की शक्ति कम लगती ह

Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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