आज हम आपको बताने वाले हैं स्टीयरिंग प्रणाली में स्टीयरिंग गियर बॉक्स मुख्य भाग होता है जितने सेक्टर तथा वर्म आदि गियर होते हैं, इन्हीं प्रबंधों के नाम पर ही स्टीयरिंग के नाम जाने जाते हैं तो आइए चलते हैं बताते हैं--
वर्म एंड सेक्टर टाइप स्टीयरिंग - इन प्रकार की स्टीयरिंग में स्टीयरिंग शाफ्ट कि निचले सिरे पर वरुण बनााााा रहता है जो सेक्टर के साथ जुड़ा रहता है इसमें वर्म ऊपर के तथा नीचे दो बेयरिंग लगे होतेे है नीचे वाले बेयरिंग के साथ इसमें एडजस्ट करने के लिए नट तथा चकनट की व्यवस्था रहती है इसके द्वारा सेक्टर तथा वर्म गियर की प्ले एडजेस्ट की जातीी है वर्म ऊपर के तथा नीचे दो बेयरिंग लगे होतेे हैं।
वर्म एंड रोलर टाइप स्टीयरिंग- इस प्रकार की स्थिति में भी वर्म का प्रयोग किया जाता है परंतु स्टीयरिंग गियर बॉक्स से इसका संबंध एक रोलर द्वारा रहता है यह रोलर सेक्टर शाफ्ट के साथ 'U' के आकार के खांचे में वेयरिंग की सहायता से लगा होता है स्टीयरिंग व्हील के घूमने वर्म घूमता है ,तथा इसके द्वारा रोलर घूमकर सेक्टर शाफ़्ट को घुमाता है ,अन्य क्रिया दूसरे सभी स्टीयरिंग जैसी होती है जैसे कि पहले बताया जा चुका है।
वर्म एंड वर्म टाइप स्टीयरिंग -यह स्टीयरिंग लगभग वर्म सेक्टर शाफ़्ट की तरह होती है परंतु इसमें सेक्टर के रूप में चौथाई से भी कम भाग का गियर प्रयोग होता है। जबकि सेक्टर शाफ्ट के ऊपर पूरा वर्म व्हील फिट रहता है।
सर्कुलेटिंग बॉल एन्ड नट टाइप स्टीयरिंग --इस प्रकार की स्टीयरिंग में सर्कुलेटिंग बॉल तथा 1 नट का मुख्य प्रयोग होता है स्टीयरिंग शाफ्ट के निचले से पर अन्य स्टीयरिंग ओ की तरह वर्म लगा होता है जोकि दो टेपर रोलर बेयरिंग की सहायता से फिट रहता है इस वर्ग के ऊपर एक चौकोर नट चढ़ा रहता है ,इन नट के चूड़ियों तथा वर्म के मध्य लोहे की छोटी गोलियां भरी जाती है जिसके लिए नट के 4 छिद्र बने होते हैं इन छिद्रों मे गोलिया भरकर 'U' टाइप ट्यूब जोकि बीच से कटा रहता है, उसमें भी गोलियां भरकर नट में बने क्षेत्रों मेंं फंसा दी जाती है ,इस प्रकार नट के चारों छिद्रों द्रव ट्यूब से बंद हो जाते हैं यह ट्यूब पत्तियां तथा पेचों के द्वारा नट के साथ कसी रहती है। नट के बाहर एक और तिरछे खाँचे कटे होते हैं जिसके साथ सेक्टर साफ्ट का संबंध रहता है जब स्टीयरिंग व्हील घुमाया जाता है तो वर्म घूमता है,तथा यह नट को अपने नीचे चलाता है इस समय नट के अंदर भारी गोलियां बियरिंंग जैसा कार्य करती है ये यह गोलियां दो अलग अलग सर्किट में होती है एक मे 25 गोलियां होती है तथा दूसरे में 13 गोलियां होती है ट्यूब के अंदर होकर नट में घूमती रहती है ,इस प्रकार के स्टीयरिंग में भी बेयरिंग द्वारा प्ले एडजस्ट करने के लिए नीचे एडजस्टिंग नट तथा चकनट दिया रहता है साइड प्ले एडजस्ट करने के लिए स्टीयरिंग गियर बॉक्स में साइड स्क्रु बना होता है।
रैक एंड पिनियन टाइप स्टीयरिंग -इस प्रकार के स्टीयरिंग में वर्म अथवा सेक्टर आदि का प्रयोग नही किया जाता है इसमें ट्रैक्टर की चौड़ाई के अनुसार एक रैक लगाई होती है जिसमें दोनों सिरों पर टाई रॉड ओर बॉल जॉइंट रहते हैं, इसका संबंध स्टव एक्सेल से रहता है स्टीयरिंग शाफ्ट के निचले सिरे पर एक पिनियन लगी होती है जिस पर रैक के अनुरूप ही दाते बने होते हैं जब स्टीयरिंग दिन घुमाया जाता है तो पिनियन के द्वारा रैक दाएं या बाएं यथास्थिति सकता है इससे स्टब एक्सेल घुमाकर टाइ रॉड की सहायता से दोनों पहियों को घुमाता है पिनियम के ऊपर तथा नीचे टेपर रोलर बेयरिंग लगे होते हैं रैक हाउसिंग में ग्रीस भरने की व्यवस्था रहती है जिससे स्नेहक का कार्य होता है इसमें बैकलेस या प्ले एडजस्ट करने के लिए स्प्रिंग लोडेड नट की व्यवस्था रहती है।
केम एंड रोलर टाइप स्टीयरिंग -इस प्रकार के स्टीयरिंग में स्टीयरिंग शाफ्ट के साथ अन्य प्रकार के स्टीयरिंग की भांति वर्म जुड़ा रहता है परंतु सेक्टर के स्थान पर एक कैम का प्रयोग किया जाता है जिस पर दो खूंटी रोलर के सामान लगी होती है जब स्टेरिंग घुमाया जाता है तो वर्म में फंसे रोलर गेम को ऊपर या नीचे करते हैं जिससे क्रॉस शाफ्ट घुमाकर ड्रॉप ऑर्म को आगे पीछे करके स्टीयरिंग को क्रियाशील बनाती है इसमें क्रास शाफ़्ट भी दो बियरिंग की सहायता से फिट किया जाता है जिसको एडजस्ट करने रोलर तथा वर्मा की बैकलेस को भी एडजस्ट किया जाता है।



