Cooling Engine system
इंजन कूलिंग प्रणाली
सभी प्रकार के इंजनों को शीतला की आवश्यकता होती है क्योंकि ईंधन का दहन इंजन के अंदर होता है इंजन सिलेंडरों में ईंधन के दहन से उत्पन्न ने सभी ऊष्मा क्रैंक्षाफ्ट में उपयोगी शक्ति में परिवर्तित नहीं होती ,केवल 30% गर्मी को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित किया जाता है लगभग 40% निकास के माध्यम से बंद होता है ।शेष 30% ऊष्मा बिना उपयोग के बेकार जाती है ,
यह देखा गया है कि सिलेंडर की दीवारों से अतिरिक्त ऊष्मा को हटाने के लिए उपयुक्त साधन उपलब्ध कराना जाना चाहिए, ताकि तापमान सीमाओं से नीचे बना रहे ,इसलिए इंजन सिलेंडर से अतिरिक्त उसमें को दूर करने की विधि को शीतलन प्रणाली कहा जाता है।
शीतलन प्रणाली के प्रकार( type of cooling system)
1.वायु शीतलन प्रणाली {air cooling system}
1.वायु शीतलन प्रणाली- इसमेंं इंजन को ठंडा करनेेे के लिए वायु का उपयोग किया जाताा है ,इसमें रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती,इस प्रणाली द्वारा ठंडे होने वाले इंजन के सिलेंडरों केे चारों और अनेक टेपर व पतले पंखा बनाए जाते हैं ,इस पंखों के कारण सिलेंडर के चारों ओर जमा होने से वायु का क्षेत्रफल बढ़ जाता है , ये पंख नुकीले होते हैं सिलेंडर की गर्मी इनकी नोक की ओर दौड़ती है यह नोक के पतलेे होने के कारण हवा केेे संपर्क में यह शीघ्र ठंडे होते हैं ,इन पंखों को फिन्स कहते हैं।
लाभ - 1.इसमें पानी जमने की कोई संभावना नहीं होती है।
2.रखरखाव सरल है।
यह दो प्रकार के होते हैं
1. कूलिंग फिन्स प्रणाली
2. वेफ़ल्स प्रणाली
2. जल शीतलन प्रणाली - इस प्रणाली मैं इंजन की अनावश्यक गर्मी को समाप्त करने के लिए पानी का उपयोग किया जाता है इंजन सिलेंडर के चारोंं ओर वाटर जैकेट बने होते हैं रेडिएटर का पानी रबड़़ होज पाइप द्वारा वार्टर जैकेट उसमें जाता है तथा सिलेंडर की गर्मी को लेकर पानी रेडिएटर में आ जाता है यहां आकर वह ठंडा होता है। यही प्क्रम चलता रहता है।
लाभ- 1.इस प्रणाली मेंं इंजन सुगठित डिजाइन वाले होते है।
2. प्रणाली का डिजाइन इंजन के आकार पर निर्भर करता है।
यह निम्न प्रकार के होते हैं
1.प्रत्यक्ष प्रणाली -
2.बलकर्त सर्कुलेशन प्रणाली-
3.दाब प्रणाली-
4.थर्मो -साइफन प्रणाली - इस प्रणाली में पानी के प्राकृतिक संवाहन का प्रयोग किया जाता है यानी गर्मी पानी का घनत्व कम होता है और ऊपर उठता है वाटर जैकेट में गर्म पानी इस तरह से ऊपर उठता है और रेडिएटर शीर्ष पर जाता है जहां से यह नीचे गुजरता है और ठंडा होता है और निखिल टैंक में एकत्रित होता है फिर से यह सिलेंडर ब्लॉक के वाटर जैकेट में जाता है इसी प्रकार यह थर्मोसायफन पानी का निरंतर चक्रम बनाए रहती है।
कमियां - 1.पानी की आपूर्ति पर निर्भर है
2. यह जल सी जल प्रणाली विफल हो तो उसमेंं इंजन को गंभीर नुकसान है
3. वाटर कूलिंग सिस्टम महंगा है क्योंकि इसमेंं कई हिस्से होते हैं
इंजन वाटर कूलिंग के घटक
इंजन वाटर कूलिंग की पुस्तकों क कई अलग अलग से होते हैं जो शीतलन प्रणाली में निम्नलिखित घटक है--
1.रेडिएटर -इसका का कार्य इंजन को गर्म पानी ठंडा करना है। इस कार्य के लिए रेडिएटर मे तांबे म की पतली न्लियां होती है इससेेे नली के चारों ओर फिन्स लगे होते है।
2.थर्मोस्टेट वाल्व - यह एक विशेष प्रकार का वाल्व है ,जो इंजन और रेडियेतर के बीच स्थापित होता है जिनमें ऐसा द्रव हो रहता है जब वाटर जैकेट का पानी 78 डिग्री सेल्सियस और 82 डिग्री सेल्सियस के तापमान से अधिक हो जाता है तो वाल्व खुलने लगता है और 95 डिग्री सेल्सियस पर पूरी तरह बंद हो जाता है।
3. हौज पाइप- वाटर पंप इंजन ब्लॉक से रेडिएटर का संबंध जोड़ने के लिए होज पाइप का प्रयोग किया जाता है यह रवर तथा सूत के धागे से बना होता है जो हौज़ क्लिप द्वारा फिट किया जाता है।
4. वाटर पंप -रेडिएटर के ठंडे पानी को पर्याप्त दबाव के साथ इंजन की वाटर जैकेट में भेजने के लिए वाटर पंप का प्रयोग किया जाता है
5. वाटर पंप फैन- वाटर पंप की शॉप पर पुलिस के ऊपर की ओर एक पंखा लगा होता है पानी ठंडा करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य होता है
6.प्रेशर कप -इसमें एक वैक्यूम वाल्व तथा प्रेशर ,वाल्व लगा होता है कैप के कैप सीट पर ओवर फ्लो पाइप की व्यवस्था रहती है जब कैप अपनी सीट पर रहती है तो रेडिएटर में पानी का दबाव बढ़ जाता है पानी का बोलिंग प्वाइंट भी बढ़ जाता है परंतु प्रेशर वालों द्वारा यह दबाव नियंत्रण में रहता है तथा व्यर्थ में इसके बहने की संभावना कम हो जाती है इंजन के ठंडा होने की स्थिति में इस प्रणाली में वेक्यूम स्थापित हो जाता है, तथा वायुमंडल के अभाव से अत्यधिक दबाव बन जाता है परंतु वेक्यूम वाल्व इसे नियंत्रित रखता है तथा ववेक्यूम को समाप्त करता रहता है।
7.वाटर जैकेट -सिलेंडर ब्लॉक तथा सिलेंडर हैड़ में रेडिएटर का ठंडा पानी पहुंचाने के लिए उनमें वाटर जैकेट बने होते हैं।
8.रेडिएटर शटर तथा काउल -इसमें इंजन का तापमान कुछ सीमा तक नियंत्रित रहता है ट्रैक्टरों में समानता है उसका प्रयोग सर्दियों में किया जाता है
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