How to take a welding test.( वेल्डिंग परीक्षण विधिया)

 परीक्षण की विधियां

{Test methods}



इन परीक्षण की विधियों के द्वारा हम बैंड जोड़ की जांच कर सकते हैं जिससे हमें पता चल जाता है कि उसमें क्या कमी है क्या नहीं है यह  विधिया दो प्रकार की होती हैं---

1.भंजनात्मक विधि   

इस परीक्षणों में जॉब को नुकसान भी पहुंच सकता है जो निम्न प्रकार है--

तंयता परीक्षण - इस परीक्षण के द्वारा वेल्ड  तन्यता सामर्थ्य पराभाव बिदु , प्रत्यास्था गुणांक ,तन्यता प्रतिशत क्षेत्रफल में कमी आदि की जांच की जाती है।

प्रभाव सामर्थ्य - पराभव बिंदु पर लोङ 
                        वास्तविक क्षेत्रफल

अधिकतम तन्य सामर्थ्य - अधिकतम बल     
                                     वास्तविक क्षेत्रफल
क्षेत्रफल में कमी की प्रतिशत- प्रारंभिक क्षेत्रफल - अंतिम क्षेत्रफल
                                                                 प्रारंभिक क्षेत्रफल ❌ 100


नग्यता परीक्षण - यह परीक्षण सबसे सबसे आसान मितव्यय
होता है इसके द्वारा वेल्डिंग के निम्नलिखित गुणों को स्थापित किया जा सकता है ,वेल्ड जोन की तन्यता तथा सामर्थ्य वेल्ड मेटल का टूटा स्ट्रक्चर उसके अंदर ब्लो होल्स गैस पार्टिकल्स स्लैग इंक्लूजन आदि दोषों को दर्शाताा है।

आघात परीक्षण- इस परीक्षण के द्वारा यह निर्धारण करना होता है कि वेल्डिंग का जोर अचानक झटके से कितना लोड को सहन कर सकता है इसके द्वारा वेल्ड नमूनों की सख्तता  निर्धारित की जाती है।


2.अभंजनात्मक विधिया

किसी प्रक्रम का परीक्षण अविनाशी रूप से किए जाने से तात्पर्य बिना आने आ जाए परीक्षण किया जाने पर है इंजीनियर कोई हानि पहुंचा उसका निरीक्षण किया जा सकता है

दृश्यक निरीक्षण- किसी इंजीनियर ऑटोइंजन का इंस्पेक्शन कर एक नजर में उसका कर उसे जारी करना या दोष का निवारण करना इंदु परीक्षणों के अंतर्गगत आता है।

इस परीक्षण के लिए मैग्नीफाइंग ग्लास की सहायता  ले सकते हैं
1. इंजन में ऑटो इंजन की सतहीय  दरारे स्पष्ट देखना।
2. रिसाव जैसे दोष दिख जाना।

डाई पेनिट्रेशन परीक्षा - इस विधि में किसी भी प्राप्त क्रम के तत्वों की सफाई करके उस पर डाई का छिड़काव किया जाता हैैैैैैै और निश्चित अवधि के उपरांत निरीक्षण कर दरारे संबंधित दोष निवारण कियाााा जा सकता है।

1.दृश्यकनिरीक्षण में स्पष्ट ना हो सकने वाले दोष स्पष्ट हो जाते हैं।
2. संयोजन के दौरान अनुपयोगी औजारों के कारण उत्पन्न दोषों का स्पष्ट दिख जाना।

रिसाव परीक्षण - लीक परीक्षण दाब प्रभाव साबुन ,चूने का पानी केे द्वारा सुनिश्चिित किया जाता है।

1. तरल के साथ-साथ वायु विषओ संबंधित दोषों का स्पष्ट निर्धारण
2. मांगे तरलों का अव्यय रोधन।

चुम्बकीय कण परीक्षण -  किसी चुंबकीय क्षेत्र में जब कोई धातुु का टुकड़ा रखा जाता है तो दरारे या ब्लोहोल युक्त होता है तो उन दोषों के दोनों किनारों पर चुंबकीय ध्रुव बन जाता है इस कारण चुंबकीय बल रेखाओं केे पथ में रुकावट पैदा होतीी है इस प्रकार बारीक कणो की लाइन दरार को और कुछ कणों के साथ इकट्ठा होना ।सत्तह के नीचे के स्नेेक इंक्लूजन या गैस पॉकेट को दर्शाता है।

1. सयोजन के दौरान उत्पन्न उष्मीय दरारों का निर्धारण
2. धातुत्विक सतह  पर एकत्रित अतिरिक्त पदार्थों का निर्धारण
3. संयोजन में लैप या ओवर लैप जैसे स्थितियों का निर्धारण

पराश्रवय परीक्षण - अल्ट्रासोनिक फैमिली पीजों इलेक्ट्रिक प्रभाव के द्वा्वारा विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदल कर उत्पन्न की जाती है इसके लिए क्वार्टर क्रिस्टल का प्रयोग किया जाता है जब उच्च आवृत्ति वैकल्पिक  धारा क्रिस्टल के दोनों सिरों पर लगाई जाती है ,तो क्रिस्टल पहले आधी चक्र में फैलता है और शेष आदि चक्र में सिकुड़ता है इस प्रकार बने मैकेनिकल वाइब्रेशन ध्वनि तरंग उत्पन्न करते हैं।
1. दोषित भागो में तरंगों के टकराकर वापस होने से दोष का निर्धरण।
2. तरंगों की प्रविष्टि दूरी से दोष विशेष कारण स्पष्ट निर्धारण।
3. तरंगों की प्रक्रिया युक्ति के आर पार हो जाने पर पराक्रम यहां युक्ति के दोष होने का निर्धारण

रेडियोग्राफिक परीक्षण रेडियोग्राफिक मेंं एक्स किरणोंं और गामा किरणें प्रयोग की जातीी हैं। इन किरणों मेंं प्रकाश और उदी पदार्थों से गुजर जानेे की शक्ति होती है, परंतु आंतरिक दोष युक्त कम सघन माध्यम के द्वारा अवशोषित हो जाती है। और फोटोग्राफिक फिल्म पर स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
1. दरारों या छिद्रों का सटिंग व यथा पूर्वक निर्धारण।
2. प्रक्रम या युक्ति में सरंध्रता की स्थिति का स्पष्ट निर्धारण।
3. प्रक्रम या संयोजन के दौरान वेल्ड जैसी प्रक्रम के कारण अतिरिक्त पदार्थ के आ जाने का निर्धारण।
4. मिश्र धातु संबंधित अनियमितता का निर्धारण

Mohit chaudhary

Hay am mohit chaudhary

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