साधारण मास्टर सिलिंडर (what is master cylinder simple diagram)
इस प्रकार के मास्टर सिलेंडर परंपरागत रूप से ट्रैक्टर में प्रयोग किए जाते हैं इनमें निम्नलिखित भाग होते हैं
1.पुश रॉड
2.डस्ट बूट
3.पिस्टन स्टॉप प्लेट
4.पिस्टन
5.लॉक रिंग
6.सेकंडरी रबर कप
7.प्राइमरी रबर कप
8.पिस्टन रिटर्न् स्प्रिंग
9.चैक वाल्व
10.वाल्व सीट
मास्टर सिलेंडर के ऊपरी भाग पर बने रिजर्वायर में ब्रेक ऑयल भरने के लिए फिलर प्लग का स्थान होता है। जिससे ब्रेक ऑयल मास्टर सिलेंडर में जाने के लिए दो मार्ग बने होते हैं। 1.बाईपास पोर्ट 2.कम्पेनसेटिंग पोर्ट। मास्टर सिलेंडर के आगे की और एंड प्लग लगा होता है। जिनमें बैंजो बोल्ट तथा यूनियन लगाई जाती है। ,जहां से ब्रेक आयल दबाव के साथ सभी व्हील सिलेंडरों में भरा जाता है दबाव के कारण मास्टर सिलेंडरों में भरा ब्रेक आयल चेक वाल्व में से होकर दववा के साथ एंड प्लग में लगी यूनियनों में से व्हील सिलेंडरों में चला जाता है व्हील सिलेंडरों के बीच में आए इस ब्रेक आयल के दबाव से भिन्न सिलेंडर के दोनों पिस्टन बाहर की ओर फैलते हैं ,और ब्रेक ड्रम को रगड़ कर धीमा करते हैं तथा अंत में रोक देते हैं ब्रेक शू तथा व्हील सिलेंडरों के पिस्टन को पुरानी जगह पर ले आती है तथा व्हील सिलेंडरों में आया ब्रेक ऑयल पाइप लाइन में होकर चेक वालों को सीट से उठाकर मास्टर सिलेंडर में चला जाता है यदि मास्टर सिलेंडर में तुरंत कोई नहीं लिया जाता है तो उसमें आया अधिक ब्रेक आयल बाईपास मैं के द्वारा रिजरवायर में स्वयं पहुंच जाता है।
टेंडम मास्टर सिलिंडर(temat master cylinder)
इस प्रकार के मास्टर सिलेंडर में परंपरागत एक स्तन के साथ स्थान पर 2 पश्नों का प्रयोग किया जाता है इसके साथ ही इसमें दो आउटलेट मार्ग भी बने होते हैं एक आउटलेट मार्ग द्वारा अगले दोनों पहियों के प्रेरकों को दबाव से तेल जाता है दूसरे आउटलेट मार्ग से पिछले पहियों के ब्रेक में तेल जाता है।
सेंटर वाल्व मास्टर सिलिंडर (center vale master cylinder )
इस प्रकार के मास्टर सिलेंडर में चैक वाल्व, पिस्टन के आगे वाल्व की डंडी पर ही लगा रहता है ।इस प्रकार के कुछ मास्टर सिलिंडर में ब्रेक फ्लूइड का रिजरवायर इसके साथ बना होता है, कुछ में अलग रहता है इसमें जब ब्रेक पैडल दबाता है ,तो पलांजर या पिस्टन आगे बढ़कर वाल्व सीट सप्लाई लाइन की पोर्ट को बंद कर देता है तथा पिस्टन के आगे आया तेल दबाव के साथ ही सिलेंडर में चला जाता है जब ब्रेक पेडल पर से दबाव हट जाता है ,तो सामान्य मास्टर सिलेंडर की भांति चेक़ वाल्व को सीट से हटा कर तेल वापस आ जाता है।
व्हील सिलेंडर (wheel cylinder )
इन सिलिंडर में मध्य की स्प्रिंग ने अपनी उपस्थिति में रबड़ कपो में अंतर डाला हुआ है, ताकि कप के पीछे का भाग पिस्टन फेस पर पूरी तरह से सटा रहे । इस खाली भाग में सिलेंडर की ब्रेक पाइप से जुड़े सुराख द्वारा तेल भरा होता है व निकासी का एयर ब्लीडिंग स्क्रू भी होता है। मास्टर सिलेंडर से बना व हुआ प्राप्त हुआ तेल दबाव व्हील सिलेंडर के रबड़ कपो को पिस्टन सहित बाहर धकेलता है ,जिससे ब्रेक शू क्रियान्वित होकर घूमते ड्रम को रोकते हैं तथा दबाव समाप्त होते ही वह ब्रेक शू भी स्प्रिंग द्वारा अंदर की खींचते हुए व्हील सिलेंडर के दोनों पिस्टनो को भी सिलेंडर के अंदर जाने की चाल देते हैं।
